Wednesday, 28 January 2015

India Vs China



आज सुबह-सुबह ठंड के मारे मेरी नींद नहीं खुली और मैं घूमने नहीं जा सका सोचा राज को Sorry बोल दुगा बेचारे के सुबह से 12 Missed Call आ चुके थे! अभी मैने उसे फ़ोन लगाने के लिए Mobile उठाया ही था की दरवाजे की घंटी बजी और मेरे दरवाजा खोलते ही राज मुझे धक्का देता हुआ अन्दर आ गया और चिढ़कर बोला "अबे आना नहीं था तो काम से काम एक Msg ही drop कर देता, पता है मैं कब से तुझे पागलो की तरह कॉल कर रहा हुँ!

मैने Sorry कहा और उसे बताया की मोबाइल Silent Mode पर था मगर उसने मेरी बात पर React नहीं किया मैने भी ज्यादा बात न करते हुए उसे पुराना पड़ा पेपर ही थमाया और उसके और अपने लिए कॉफी बनाने किचन में चला गया! जब मैं दोनों हाथो में मग लेकर बाहर आया तब राज Dr. Bharat Jhunjhunwala का Article "कर्ज लेकर घी पीने से नहीं बनेगी बात" पढ़ रहा था! फिर मेरे आते ही उसने पेपर Side में रख दिया और India Vs China युद्ध शुरू करते हुए बोला देख कितना बढ़िया Article है!

देख,कितना सही लिखा है "भारत सरकार देश को गिरवी रखकर जनता को अमेरिकी सेब खिला रही है,जब की चीनी सरकार अपनी जनता की इच्छाओ पर अंकुश लगाकर अपनी पैठ स्थापित कर रही है" ! 


फिर अच्छे खासे Article  को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर बताने लगा इसका मतलब समझ बेटा China पैसे को जमा कर रहा है जब की India पैसो को खर्च कर रहा है इसीलिए तो China Import  ज्यादा करता है और Export कम ये करके वो अमेरिका पर Rule करना चाहता है ! जबकि अपन उल्टा करते है इसीलिए तो India दोबारा गुलामी की तरफ बढ़ रहा है! हम MNC बुलाना चाहते है जब की Indian Business को Avoid करते है वैसे भी अपन आधे गुलाम तो है ही क्योकि Worldwide  Language तो इंग्लिश ही मान्य है और World Bank  करेंसी भी $ ही सर्वमान्य है ! तभी तो सारी सम्पत्तिया $ में गिनी और बताई जाती है! जैसे Crude 40 $/ barrel है अरे इंडिया में बता रहे हो बोलते क्यों नहीं 2400 रुपए /बैरल है !


जानता है भाई China में 34% Student Engineering की पढ़ाई करते है जब की India में केवल 6 % student Engineering करते है मगर उसके बावजूद हमारे यहाँ उनके मुकाबले Quality Engineers की सख्या कम है और जो कुछ है वो अमेरिका की तरफ रुख करना चाहते है क्योकि हमारे यहाँ Foreign Jobs,Foreign Education को बढ़ावा दिया जाता है फिर बेचारा बंदा जायेगा भी क्यों नहीं वहां Package  जो ज्यादा है और Package  इसलिए ज्यादा है क्योकि 1950 में 1 $= 4 Rs होता था वही आज 1 $= 60 Rs हो गया है! यानि हम 65 सालो में 1 :4  से direct 1:60  पर पहुंच गए है !

भाई, सिर्फ मेरा भारत महान बोल देने से कोई देश महान नहीं बनता उसे महान बनाना पड़ता है और जैसे अगर तुझे खुश रहना है तो तू जबरजस्ती का कर्ज मत ले,अपने अंदर Improvement कर,अपने Relation सभी से सुधारकर शक्तियों को  मजबूत कर,अपने लोगो का पहले Support  कर, अब तू ही सोच भाई जब ये बाते एक बन्दे पर लागू हो सकती है तो फिर एक देश पर क्यों नहीं ?


 Finally इतने लम्बे भाषण को राज ने ये कहते हुए विराम दिया की छोड़ यार,कौन दिमाग लगाये वैसे भी अपने देश में सरकारी नौकरी में चपरासी बनने के लिए Qualification लगती है जबकि नेता तो अंगूठा छाप भी चल जाता है !

इतना बोलकर और मुझे कल Time पर Walk पर आने की हिदायत देकर राज चला गया जबकि में अब भी एक मूकदर्शक कि तरह वहां खड़ा था  !   

Public है ये सब जानती है


आज सुबह-सुबह में उठ तो गया मगर ठंड को देखते हुए रजाई से बाहर निकलने का मन ही नहीं हुआ सोचा,राज का फ़ोन आएगा तब उठुगा और घूमने जाऊगा फ़ोन तो नहीं आया! हाँ थोड़ी देर बाद मैसेज जरूर आया! लिखा था"भाई आज बहुत ठंड है मैं तो नहीं आ रहा,तुझे जाना है तो जा" पहले तो मैने भी सोचा कौन रजाई से निकले,मुँह धोये और घूमने जाये फिर अचानक मुझे मेरी बाहर आती तोंद का ख्याल आया और मैने सोने का त्याग किया और अकेला ही घूमने निकल गया ! 

न जाने क्यों आज सुबह-सुबह मुझे अपनी नहीं बल्कि देश की चिंता होने लगी और मैं मन ही मन सोचने लगा की क्या होगा इस देश का ? यहाँ कोई कुछ समझता ही नहीं कितना कुछ गलत हो रहा है और यही सब सोचते सोचते कब मैं' घर से निकलकर चौराहे पर पहुंच गया कुछ पता ही नहीं चला! जब मै चौराहे पर पंहुचा तो मैने देखा चाय की दुकान पर दो मजदूर ठंड से बचने के लिए आग तापते हुए पेपर पढ रहे थे मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ और ख़ुशी भी की चलो बढ़िया है देश तरक्की कर रहा है ! मैने देखा वो इतने परेशान दिख रहे थे मानो उनके ऊपर घर चलाने की नहीं बल्कि देश चलाने की जिम्मेदारी हो"वैसे भी आज की मँहगाई के ज़माने में देश चलाना आसान है घर चलाना मुश्किल" खैर मैने उनसे तो कुछ नहीं कहा बस एक चाय का गिलास उठाया और उनकी बाते सुनने उनके पास वाली चेयर पर बैठ गया ! उन्होंने भी मेरी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और आपस में बतियाते हुए बोले"देखो भैया पेपर में लिखा है Crude के दाम कम होने पर भी पेट्रोल और डीजल के दामो में कोई कटौती नहीं हुई,क्योकि अपनी सरकार ने अपना हिस्सा बड़ा दिया और अब सरकार प्रतिशत के हिसाब से नहीं बल्कि प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल पर अपना टैक्स लेगी और अपनी बैंड बजेगी क्योकि अब कल अगर पेपर में आया की सब्जियों के दाम कम हो गए है तो सब यही कहेंगे! पेपर में आया है टमाटर 20 रुपए किलो है आप 40 रुपए किलो बेच रहे हो इतनी लूट अच्छी नहीं भैया! अरे अब इन पढ़े-लिखो बेवकुफो को कौन समझाए की माल मंडी तक और मंडी से हमारी दुकानो और ठेलो तक तो रिक्शों और ट्रको से आता है न! सब्जी के दाम भले ही कम हो गए हो मगर सरकार ने पेट्रोल के भाव बढ़ाकर भाड़ा तो बड़ा दिया ना ये किसी को दिखेगा नहीं बस सब हमें ही लुटेरा समझेगे! 

तभी उसका साथी बोल पड़ा सच कहते हो भैया ये सरकार भी केवल सिगरेट और शराब पर टैक्स बढ़ाती है उन्हें बंद नहीं करती! पता है अपने बंसी काका का बेटा अभी 2 महीने पहले ज्यादा नशा करने के कारण मर गया "क्या करे भैया पीने वाले को मना करो तो वो मानता नहीं, और सरकार रोकती नहीं बस टैक्स बढ़ा देती है तो सिगरेट शराब मँहगी हो जाती है,पर इससे पीने वाले को क्या वो तो घर पर मार-पीट करके पैसे ले ही जाता है और पीता है ! फिर दूसरी तरफ धूम्रपान स्वास्थ के लिए हानिकारक है ऐसे विज्ञापन आते रहते है! अरे हम तो कहते है की जब मिलेगी ही नहीं तो ससुरा कोई पियेगा कैसे और जब पियेगा ही नहीं तो मरेगा नहीं !
बोल तो ठीक रहे हो भैया लेकिन करे क्या ऊपर सबको पैसा मिलता होगा इसलिए चलने देते होगे बेचारी जनता जिए या मरे इससे उन्हें क्या?वैसे भी अपने को तो वो 5 साल में एक ही बार याद करते है और तभी अपने पर जी भरकर पैसा भी लुटाते है !अरे वो क्या सोचते है क्या हम जानते नहीं की ये छुटपुट नेता जिन्हे सरकार की तरफ से तनखाह के नाम कोई 20-25 हज़ार मिलते होगे क्यों चुनावो में लाखो रुपए खर्च करते है? ऊपर से बोलते है हमें चुनो हम आपका भला करेंगे अरे हमारा भला करोगे या अपनी जेबे भरोगे! 

अरे हम तो 5वी से ज्यादा पड़े नहीं भैया तब भी इतना जानत है की गलत हो रहा है तो क्या ये बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमने वाले अफसरों को ये सब नहीं दिखता है क्या ?

अरे दिखता है भैया बस कोई कुछ कहता नहीं ! 
 क्यों ? 
अरे ये क्यों क्या छोड़ अपन चले पहले रोजी-रोटी की जुगाड़ करे वरना कल अख़बार में खबर आएगी देश ने तरक्क़ी की मगर हकीकत में अपने जैसे गरीबो के यहाँ चुल्ले भी नहीं जलेंगे !

Finally इतने बड़े discussion के बाद वो दोनों वहां से चले गए अब मुझे समझ आ रहा था की मैं गलत था जानते सब है बस कोई कुछ कर नहीं सकता ! 

 खैर किया तो मैने भी कुछ नहीं बस चाय वाले को पैसे चुकाए और"ये जो पब्लिक है ये सब जानती है ये जो पब्लिक है" गाना गुनगुनाते हुए घर आ गया !

हाँ उनका आखिर शब्द "क्यों"अब भी मेरे दिमाग में घूम रहा है !  



   


Monday, 5 January 2015

कौन अपना कौन पराया




अरे सुनो हम गाँव जा रहे है तो वहां तुम सबके साथ बढ़े प्यार से रहना,सबकी बात मानना,मम्मी पापा की Respect करना,जाते ही सबके पैर छूना समझी-राहुल ने प्रिया को समझाइश देते हुए कहा !

अरे बस-बस कितना बोल रहे हो प्रिया ने राहुल को टोकते हुए कहा मैं क्या कोई विदेश से आई गुड़िया हूँ!
जो मुझे कुछ भी पता न हो की क्या करना है, क्या नहीं ? मुझे सब पता है तुम टेंशन मत लो- प्रिया ने चिढ़ते हुए कहा और सूटकेस ज़माने में बिजी हो गई !

दरअसल राहुल और प्रिया की नई-नई शादी हुई थी और मुम्बई में अपनी जॉब के चलते शादी के एक साल बाद राहुल और प्रिया पहली बार अपने घर जा रहे थे! राहुल के घर में वैसे भी गिने चुने 3 लोग ही तो थे! मम्मी, पापा और वो खुद जिसमे भी राहुल तो कभी घर में रहा ही नही पहले पढ़ाई के चक्कर में घर से दूर था तो अब जॉब के चलते घरवालो से दूर हो गया था! मगर आज वो अपने घर जा रहा था और मम्मी पापा को सरप्राइज देने के लिए उसने काफी सारे गिफ्ट लिए थे जो प्रिया ने सूटकेस में रखे या नहीं ये वो कम से कम 10 बार पूछ चूका था ! वैसे तो राहुल के एक ही सवाल को बार बार पूछने पर प्रिया को चिढ़ मच रही थी मगर राहुल के चेहरे पर Excitement और ख़ुशी देखकर प्रिया ने उसे कुछ नहीं कहा और दोबारा सूटकेस Reopen करके राहुल को सारे गिफ्ट दिखाए जो वो मम्मी पापा को देने के लिए लाया था और फिर राहुल को खुश होता देख प्रिया भी मुस्कुराने लगी !

हवाई जहाज और कार के सफर ने सफर को छोटा बना दिया और कुछ ही घंटो में प्रिया और राहुल गाँव पहुंच गए और मम्मी-पापा से बाते करने और उन्हें गिफ्ट दिखने में बिजी हो गए! मम्मी बहुत खुश थी क्योकि राहुल को उन्होंने पुरे एक साल बाद देखा था जबकि प्रिया से तो ये उनकी Informally पहली ही मुलाकात थी! जिससे अपने बेटे-बहु के साथ होने की ख़ुशी उनके चेहरे पर बार-बार आँसुओ के रूप में झलक रही थी! वैसे तो राहुल के पापा भी खुश थे पर क्या करते पापा तो पापा ठहरे हमारे यहाँ पापा के इमोशनल होने का रिवाज नहीं है इसलिए वो मम्मी का रोने में साथ नहीं निभा रहे थे ! हाँ आँखे उनकी भी नम थी मगर वो रो नहीं रहे थे बल्कि उन्हें तो इस बात की ख़ुशी थी की राहुल इस बार पुरे 20 दिनों के लिए आया है! क्योकि राहुल एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और उसे कंपनी ने अभी कोई नया प्रोजेक्ट अलॉट नहीं किया था इसलिए वो पुरे 20 दिनों के लिए इस बार गाँव आया था!

पुराने दोस्तों,रिश्तेदारो,गाँव में अलग-अलग जगह घूमने में ही राहुल और प्रिया के 20 दिन कब पुरे हो गए उन्हें पता ही नहीं चला! इन 20 दिनों में राहुल की इज़्ज़त अपने गाँव में और बढ़ गई थी क्योकि इन 20 दिनों में एक बार भी राहुल ने पापा की किसी बात को नहीं टाला,वो जहाँ-जहाँ बोलते राहुल उनके साथ मिलने जाता उनकी हर बात मानता,अपने जिस भी किसी परिचित से पापा राहुल को मिलाते राहुल तुरंत उनके पैर छूता यही सब देखकर अब गाँव में राहुल की इज़्ज़त और बढ़ चुकी थी और अब सभी राहुल जैसा लायक बेटा बनने  की सलाह अपने बच्चो  को देते रहते ! कुल मिलकर इन 20 दिनों में राहुल पुरे गाँव का आदर्श बेटा बन चूका था ! जो अपने मम्मी-पापा की कोई बात नहीं टालता था ! हाँ  प्रिया की जरूर घर में एक दो बार नोक-झोक हुई मगर वो भी इतनी छोटी की कब सुलझ गई किसी को पता ही नहीं चला ! 20 दिन हँसते खेलते यू बीत गए मानो कल की बात हो !

 अगले दिन सुबह सुबह ही राहुल और प्रिया को मुंबई के लिए रवाना होना था इसलिए वो दोनों अपने कमरे में सूटकेस ज़माने में बिजी थे और जैसे आज से 20-21 दिन पहले राहुल प्रिया से गिफ्ट सूटकेस में रखे या नहीं ये पूछ रहा था! वही आज वो इस चीज की तसल्ली कर लेना चाहता था की मम्मी के दिए लड्डू और मठरी प्रिया ने बैग में रखे या नहीं !

 राहुल को इस तरह खुश देखकर प्रिया ने मुस्कुराकर राहुल से कहा " राहुल, क्यों न हम मम्मी पापा को भी अपने साथ मुंबई ले चले वो भी हमारे साथ वही रहेंगे, सब साथ रहेंगे बड़ा मजा आएगा फिर लड्डू का डब्बा राहुल को दिखाते हुए बोली तुम्हे ये पसंद है न मम्मी वहाँ होगी तो जब तुम्हारा लड्डू खाने का मन करे बोल देना वो बना देगी !

अरे प्रिया, कैसी बात करती हो? क्या करेंगे वो वहा आकर,गाँव में आराम से ही तो रह रहे है किस चीज़ की कमी है यहाँ उन्हें मैं हर महीने पैसे भी भेजता रहता हुँ ! नहीं-नहीं मम्मी-पापा हमारे साथ नहीं आयेगे! राहुल ने अपना फैसला प्रिया को सुनते हुए कहा

नहीं राहुल,मेरी बात तो सुनो इन 20 दिनों में मुझे महसूस होने लगा है की पिछले एक साल में हमने क्या खोया है! मुझे इन 20 दिनों में मम्मी-पापा के साथ रहकर ये अहसास होने लगा है कि घर और मकान में बहुत फर्क है और मैं चाहती हुँ की हम भी अपने मकान को घर बनाये और मम्मी-पापा के साथ रहे !

प्रिया,बेवकुफो जैसी बाते मत करो राहुल ने चिढ़ते हुए कहा "अरे यार देखो मेरा दिमाग ख़राब मत करो 15-20 दिनों के लिए साथ रहना,सबकी बात मानना,सबको adjust कर लेने में प्रॉब्लम नहीं आती मगर हमेशा साथ रहना अलग बात है! तुम्हे याद है जब हम यहाँ के लिए आ रहे थे तो मैने तुम्हे कितनी बाते सिखाई थी!समझो प्रिया,15-20 दिन सब adjust हो जाता है फिर नहीं हो पाता,समझो यहाँ मैं mindset करके आया हूँ!जो घरवाले बोलेगे वो करुगा वहाँ थोड़े ही होगा मुझसे ये सब और फिर तुम्हारी भी जॉब है अगर मम्मी-पापा ने वहा आकर तुम्हे जॉब नहीं करने दी तो नहीं-नहीं हम न तो रुक सकते है न ही मम्मी पापा को अपने साथ ले जा सकते है! तुम ये साथ रहने का भूत अपने सर से उतार दो हाँ अगर तुम्हे यहाँ इतना अच्छा लगा तो अगली बार से हम हर 6-6 महीने में आते जाते रहेंगे!                
 
 कैसी बात कर रहे हो राहुल मम्मी-पापा दोनों को पता है की में वहा जॉब करती हुँ तो उन्हें क्यों Problem होने लगी! मैं तो कहती हुँ तुम ये सब बेकार की बाते छोड़ो और मम्मी को भी बैग पैक करने का बोल दो !

Stop it Priya ,तुम्हे क्या एक बार में मेरी बात समझ नहीं आती?- राहुल ने चिल्लाते हुए कहा

अब ध्यान से सुनो न तो मम्मी-पापा हमारे साथ चल रहे है और न ही तुम अब इस बारे में घर में किसी से बात करोगी, समझी! प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया और चुप-चाप सोफे पर बैठी रही! वही पापा भी कमरे के बाहर खिड़की से टिक कर चुपचाप खड़े हाथो में अचार से भरी एक बर्नी थामे अपने बेटे-बहु की बाते सुन रहे थे! फिर अचार दिए बिना ही दोबारा अपने कमरे में आ गए और पलंग पर आकर बैठ गए!अपने पति के हाथ में अचार की बर्नी देखकर राहुल की माँ भी अपने पति के पास आकर बैठ गई और बोली "सुनो जी,राहुल अभी तो आया था और अब कल जा भी रहा है मेरा तो मन ही नहीं भराया मैं क्या कहती हूँ,आप राहुल से बात करो न वो क्या है प्रिया न कुछ नए ख्यालात की है अगर उसे कुछ प्रॉब्लम न हो तो क्यों न हम ही कुछ दिनों के लिए उनके पास मुंबई चले! आप रिटायर तो हो ही चुके हो फिर हमारा एक ही तो बेटा है हम वहां रहे या गाँव में क्या फर्क पड़ता है !

राहुल तो अपना है उसे तो हमारे वहाँ आने से ख़ुशी ही होगी !हाँ प्रिया जरूर पराई है अगर उसे कुछ ..........
इससे पहले राहुल की मम्मी कुछ और कहती पापा तुरंत बोल पड़े वो मेरी बेटी है और आज में जान गया हूँ कि कौन अपना है और कौन पराया !
   

Saturday, 3 January 2015

पैसा बरस रहा है ?


                                                  


                                                     Is Investment is a game ? 

आज सुबह-सुबह मेरे पास एक Investment Advisory company के एजेंट का कॉल आया मेरे फ़ोन उठाते ही उसने कहा सर आप shares या commodities में Trade करते है क्या ?
मैने ऐसे ही हाँ में जवाब दे दिया उसने मुझे बताया सर आप हमारे through Trade कीजिये फिर उसने कहा सर आपके पास Invest करने के लिए कितना fund है ! मैने ऐसे ही एक लाख बोल दिया ! मेरे इतना कहते ही वो झट से बोल पड़ा सर आपके पास एक लाख का fund है ना Invest करने के लिए आप उसे हमारी कंपनी के through Invest कीजिये हमारी कंपनी आपको 15-20 हज़ार रुपए महीने का रिटर्न दिलवाएगी !

मुझसे रहा नहीं गया और मैने पूछ ही लिया यार 20%/month Return कैसे दिलवाओगे तो कहने लगा सर 20% थोड़े ही न है आप रोज वही एक लाख Invest करेंगे मतलब 20-25 दिनों में करीब 20-25 लाख Invest करेंगे ! हम तो आप को केवल1% यानि 20,000 /month का ही बोल रहे है कई Customers को तो हमने 2-3 % यानि 40-50 हज़ार रुपए महीने तक का रिटर्न दिलवाया है !

OK तो आपकी फीस कितनी है : मुझे अभी लेना तो नहीं था फिर भी मैने पूछ लिया!
 सर 6000 Only
और आपकी salary - अचानक ही मेरे मुँह से निकल गया !
क्या सर :-उसने  अचरज से कहा
नहीं कुछ नहीं : मैने कहा

बस सर,आप एक बार हमसे जुड़कर देखिये आपके लिए तो मेरे पास एक दम 100% guaranteed Tip है!
आप आज ही पैकेज ले लीजिये हमारी फीस तो एक दिन में ही निकल जाएगी तो सर क्या कहते है आप Payment बैंक में जमा करना पसंद करेंगे या Card से उसने बड़े ही confidence के साथ कहा!

एक पल को तो इतने मस्त रिटर्न सुनकर मुझे लालच आ गया और लगा की मैं अभी के अभी ही उसकी Scheme का हिस्सा बन जाऊ! मगर फिर मुझे राज अंकल का ख्याल आया जिन्हे में एक अच्छा Investor मानता हु ! इसलिए मैने उससे अभी Pack लेने के लिए तो मना कर दिया और कल कॉल करने के लिए कहा और फ़ोन काट दिया !
उसका बताया हुआ Return अब भी मेरे दिमाग में घूम रहा था !  इसलिए मैं तुरंत तैयार हुआ और राज अंकल के ऑफिस पहुंच गया! उस वक़्त अंकल के यहाँ कुछ लोग इस बात पर discussion कर रहे थे की Birla बेच दू, TATA खरीद लू ,सभी के चेहरो पर डर (पैसे खोने का डर ) साफ़ दिखाई दे रहा था ! अंकल उन्हें समझा रहे थे की टेंशन मत लो! अंकल ने कहा "कमाना है तो कुछ भी खरीद लो और 2019 तक Wait करो" आपने अभी जो भी नाम लिए है वो सभी कंपनी कमाकर देगी पर अभी खरीदू-बेचू करोगे तो TATA-Birla खुद आकर भी आपकी कमाई नहीं करवा सकते इसलिए शांति रखो और आराम करो! अभी अंकल का बोलना ख़त्म ही नहीं हुआ था की एक Banker अंकल बीच में बोल पड़े अरे साहब आप देखना परसो फिर भाव बढ़ेंगे और फिर सभी आपस में बहस करने लगे !

राज अंकल ने मुझे कोने में खड़ा देखा तो अपने पास बुला लिया और मेरे इतनी सुबह सुबह यहाँ आने का कारण पूछने लगे ! मैने उन्हें सुबह हुई मेरी और उस Agent की सारी बाते बताई !

मेरी बातो पर हँसते हुए अंकल बोले अरे यार ऐसे share की उछाल तो मैने कही देखी नहीं की तुम उसके कहने से एक लाख लगाओगे और Guaranteed 20,000 /month कमाओगे !

                                                      फिर बोले अच्छा कल एक काम करना उसे बोलना 100 रुपए के Stamp पर केवल इतना लिखकर दे की वो तुम्हे इन एक लाख रुपयो के बदले 5000 /month दिलवाएगा ! अरे भाई मेरा करीब 20-25 लाख का टोटल दुकान-फर्नीचर का आज का setup है ! मुझे ही अगर कोई 5 % दे यानि मेरे 20 लाख के setup के बदले1 लाख रुपए महीना सुखा profit  दे और जिंदगी भर ऐसे ही देते रहे तो मैं तो आज से ही काम करना बंद कर दू !

अरे यार ऐसा पैसा कहाँ बरस रहा है?

याद रखो ये सब Trader के काम है जो रोज सट्टा लगाते है जबकि तुमने कभी सुना है की Warren Buffet या Peter Lynch Trader थे नहीं वो Investor थे इसीलिए कमाते थे ! फिर मुस्कुराते हुए बोले 5 % नहीं बेटा 500% मिलेगा मगर Trader (सट्टोरियो) की तरह रोज-रोज लगाने से नहीं बल्कि Investor की तरह समझ के लगाने पर मिलेगा ! हाँ पर अगर लिख कर दे तो हमें जरूर बताना और ये बोलकर अंकल दोबारा मुस्कुरा दिए !

अच्छा अंकल तो आपके हिसाब से वो क्या करेंगे -मैने  पूछा 

मेरे हिसाब से तो 50 Customer को बोलेगे X share बढ़ेगा और 50 को बोलेगे X share घटेगा अब कुछ
तो होना ही है! अब बढ़ गया तो बढ़ने वाले 50 महीने भर के लिए उनके भक्त हो जायेगे बाकि बचे 50 लोग उन्हें छोड़ देंगे !
वैसे भी ये Trader पर focus करते है Investors पर नहीं !

वहाँ बैठे ज्यादातर लोग अब भी खरीदू-बेचू ही कर रहे थे ! उन्हें देखकर अब मैं समझ गया था की ये सब
Trader है जबकि राज अंकल Investor

2019 आएगा और Banker Uncle फिर रोयेंगे जब की Broker Uncle तब भी कमाएंगे और यही कहेंगे की शांति रखो 2024 आएगा तब भी Rate बढ़ेंगे  क्योकि वो जानते है -----


               Investment is a mind game not a casino game  
  
     
    

Thursday, 1 January 2015

" रोटी मत दो, रोटी बनाने दो "



कल दोपहर को जब मैं बोर हो रहा था तो अपनी Favorite Movie OMG लगाकर बैठ गया! उसके एक सीन में परेश रावल जब सड़क से गुजरता है तो एक बच्चा अल्लाह के नाम पर कुछ दे दे, इस Style में भीख मांगता है! तब परेश रावल उससे कहता है की "ये अल्लाह के नाम पर भीख मांगना बंद कर दे भाई, और कुछ मेहनत का काम कर तो अल्लाह भी खुश होगा" ऐसा कहकर और उसके कटोरे में 500 रुपए का नोट डालकर वो आगे बढ़ जाता है ! फिर मूवी के End में बताया की वो बच्चा Boot Polish का काम करने लगता है!

जब ये सीन ख़त्म हुआ तो मुझे हैदराबाद के मेरे पडोसी राज भैया और उनका बनाया हुआ वो Concept सही लगने लगा की " रोटी मत दो,रोटी बनाने दो "

भैया अक्सर कहा करते थे की हमारे यहाँ किसी को रोटी नहीं देते ( I Mean Paise) बल्कि रोटी बनाने का सामान दे देते है ( I Mean Job ) और फिर उस सामान की मदद से वो बंदा खुद भी रोटी खाता है और हमें भी खिलाता है और एक बार उसे रोटी बनाते आ गई तो वो हमारे पास रहे या कही और वो कभी भूखा नहीं मरता!

मुझे याद है की तब मुझे उनकी बात पूरी तरह से समझ नहीं आई थी इसलिए मैने उनसे कहा भी था की क्या भैया कुछ भी कहते हो? "मदद तो मदद ही होती है,"चाहे पैसे की करो या काम की "बस मदद करने की नियत होना चाहिए!

 मगर राज भैया भी कहा मानने वाले थे बोले देख, ऐसा नहीं है तुझे क्या लगता है मदद करना भी क्या हमेशा अच्छा होता है

हाँ : मैने मुंडी हिलाते हुए कहा!

नहीं भाई ऐसा नहीं है सब यही सोचते है यहाँ तक की हमारी सरकार भी यही सोचती है तभी तो वो गरीबो को 1 रुपए किलो में गेहूँ, 2 रुपए किलो में चावल,एक बत्ती मुफ्त कनेक्शन और भी न जाने क्या क्या बाटत्ती रहती है! 

अरे क्या भैया आप भी,सरकार बेचारी अगर गरीबो को कुछ दे कर उनका भला कर रही है तो इसमें आपको क्या प्रॉब्लम है-मैने थोड़ा चिढ़ते हुए कहा 
        
 बोले देख,तू समझ इसमें सबका नुकसान है मदद पाने वाले का भी और देने का भी !

 क्योकि अगर उन्हें हर चीज़ मुफ्त के भाव में मिलने लगी तो वे काम ही क्यों करेंगे? अरे इसीलिए तो ये हालत है की एक तरफ आप बेरोजगारी का रोना रोते रहते हो तो दूसरी तरफ हम दुकानदारो को दुकानो पर काम करने वाले मजदूर नहीं मिलते ! ऐसा इसलिए होता है क्योकि जब उन्हें सब कुछ मुफ्त में ही मिल जाता है तो वो जबरजस्ती हमारे यहाँ आकर अपना पसीना बहाना ठीक नहीं समझते ! तो अगर सरकार चाहती है की सच में गरीबी मिटे तो उन्हें सभी को काम देने पर ध्यान देना होगा न की सामान देने पर !
  
तो चलो आप ही बताओ की क्या करना चाहिए? 

अरे करना क्या देख, हम भी अपने लोगो को गाँव से यहाँ लाते है,यहाँ लाकर हम उन्हें काम सिखाते है, फिर उन्हें काम देते है कुल मिलकर अगर में Short में कहु तो हम उन्हें "रोटी नहीं देते बल्कि रोटी बनाने देते है"!
अभी तूने कहा न की दौनौ में क्या फर्क है तो मैं तुझे बता दु की रोटी देने और रोटी बनाने देने में बहुत फर्क है!

क्योकि रोटी दे देने से रोटी मागने वाले की ,मागने की आदत हो जाएगी और अगर एक बार उसे रोटी मागने की आदत पड़ गई तो फिर वो हमेशा मांग कर ही खाना चाहेगा ! (क्योकि ये आसान है) 

जबकि रोटी बनाने देने I mean काम देने से होगा ये की एक तो उसे उसकी असली कीमत समझ आएगी! दूसरा खुद के दम पर रोटी पाने से उसमे Confidence भी बढ़ेगा और वो अपने को किसी लायक भी समझेगा और सारी ज़िन्दगी आराम से कमाकर खाएगा !

दूसरा फायदा बताते हुए भैया ने कहा की रोटी तो चाहे कितनी भी दो कभी न कभी तो खत्म हो ही जाएगी !(मदद चाहे 10,000 की करो या 50,000 की)  एक न एक दिन तो पैसे खत्म होने ही है और उनके खत्म होते ही मदद मागने वाला दोबारा हाथ फैलाने लगेगा ! इससे तो अच्छा ये है की जिसकी आप 10,000 की मदद करने वाले थे उसी को 5,000 रुपए का काम दिलवा दो इससे फायदा ये होगा की वो सारी ज़िन्दगी उस काम से कमाकर खायेगा और रोटी बनाने ( काम देने वाले ) में मदद करने वाले का ज़िन्दगी भर अहसान मानेगा ! इसमें एक अच्छी बात और ये भी होगी की रोटी देने (काम देने) वाले के मंन में भी कभी ये नहीं आएगा की साला मुफ्त की रोटिया तोड़ रहा है !

आखिर में बोले भाया हमारे यहाँ कहते है की अगर किसी बेसहारा बूढ़े व्यक्ति की मदद करना, उसे रोटी खिलाना पुण्य का काम है तो किसी हट्टे कट्टे को बिठाकर रोटी खिलाना पाप का ! 

क्योकि ऐसा करके आप उस इंसान की तरक्क़ी रोक देते हो! 

मैं अभी राज भैया की इन सब बातो को याद कर ही रहा था कि राज भैया का हैदराबाद से कॉल आ गया और मैं रोटी बनाने ,खाने की इन बातो को छोड़कर राज भैया से बाते करने में बिजी हो गया!



Tuesday, 23 December 2014

लड्डू


 नहीं पापा क्या करेंगे चलकर आपको तो पता ही है मैं ऐसी जगहों पर बोर हो जाता हूँ -राज ने अपने पापा से कहा
पापा ने राज को समझाया बेटा ऐसा नहीं बोलते 26 जनवरी का कार्यक्रम तो देखना ही चाहिए वहां देशभक्ति के गीत होगे,भाषण होगे, हाँ तुम्हे आखिर में लड्डू भी मिलेगा!
               

राज जाना तो नहीं चाहता था न ही उसका पापा की बात मानने का कोई मन था! मगर जैसे ही पापा ने लड्डू   का नाम लिया तो राज झट से पापा के साथ चौराहे पर हो रहे "एक शाम भारत माँ के नाम " देखने चलने के लिए तैयार हो गया! राज आ तो गया मगर उसका मन वहाँ नहीं था उसे इंतज़ार था तो बस इस बात का की कब नेताजी अपना भाषण खत्म करें और उसे लड्डू मिले जिसके लिए वो यहाँ आया था! इसीलिए जब से वह वहाँ आया उसने नेताजी के भाषण सुनने से बढ़िया गाने सुनने में Interest लिया और मोबाइल पर गाने सुनने  में बिजी हो गया! इधर नेताजी देश की बेरोजगारी,गरीबी असमानता ऐसे बड़े बड़े मुद्दो पर भाषण दे ही रहे थे कि दूसरी तरफ एक बच्चे ने आकर राज के साथ खेलना शुरू कर दिया और जैसे ही राज ने बच्चे को गोद में उठाया की बच्चे ने राज के कानो में लगे ईयरफोन को मोबाइल से जुदा कर दिया जिससे पंडाल में जहा अब तक शांति और केवल नेताजी का भाषण ही सुनाई दे रहा था! वही अब "उल्लाला -उल्लाला " की आवाजे गुजने लगी!

जिसे सुनकर नेताजी ने गुस्से से राज  की और देखा और सारे कार्यकर्ता भी राज की और लपके क्योकि उनके हिसाब से ये उनके नेताजी का अपमान था की कोई उनके भाषण के बीच गाने सुन रहा था! मगर इससे पहले वे कुछ करते पापा ने राज को डाट लगाई और उसका मोबाइल छीनकर उसे बंद करके अपनी जेब में डाल लिया!

भाषण ख़त्म हुआ और भाषण के खत्म होने पर पार्टी कार्यकर्ताओ ने सभी आने वालो को 1-1 लड्डू देने की व्यवस्था कर रखी थी! जिसके चक्कर में ही सारा पंडाल नेताजी का भाषण सुनने आया था! लड्डू लेने के लिए सभी को एक लाइन से जाना था इसलिए राज भी अपने पापा के साथ लाइन में खड़ा हो गया और लाइन के साथ-साथ आगे बढ़ने लगा! जब राज आगे बढ़ रहा था तो उसने नेताजी को किसी बूढ़े आदमी पर चिल्लाते सुना "वे अपने चमचो से कह रहे थे इस बूढ़े को किसने घुसने दिया बाहर करो इसे और तभी नेताजी की आज्ञा का पालन करते हुए एक चमचे ने उस बूढ़े आदमी को लाइन से धक्का दे दिया! बूढ़ा बेचारा एक गड्डे  में जा गिरा! इधर लाइन अब भी अपनी रफ़्तार से आगे बढ़ रही थी किसी ने उस बूढ़े की और ध्यान नहीं दिया! हाँ राज कुछ कहना चाहता था पर पापा ने उसे रोक दिया और अपनी जेब से मोबाइल निकालकर राज को दे दिया! मोबाइल पाकर राज खुश हो गया और गाने सुनते-सुनते लाइन के साथ आगे बढ़ने लगा और बढ़ते-बढ़ते वो अब लड्डू बाँट रहे नेताजी के सामने पहुंच गया! नेताजी ने अपना मुँह टेड़ा करते हुए राज के हाथ में एक लड्डू थमाया और दुबारा अपने चेहरे पर कुटिल मुस्कान बिखेरते हुए लड्डू बाटने में बिजी हो गए!

राहुल जैसे ही भीड़ से अलग हुआ उसने पापा से भी उनका लड्डू मांगा! पापा ने बड़े प्यार से अपने बेटे के सर पर हाथ फेरा और उसे लड्डू देकर स्कूटर लेने चले गए! अब राज दोनों लड्डूओ को अपनी मुठ्ठी में बांधकर उसी बूढ़े आदमी के पास गया और उसने अपना और पापा दोनों का लड्डू उस बूढ़े को दिया और उसे बाय बोलकर पापा के साथ स्कूटर पर बैठकर चला गया !             

Monday, 22 December 2014

तू बुरा बन जा


राहुल और प्रिया की नई-नई शादी हुई और प्रिया जो अब तक अपने पापा के साथ अकेली रहती थी उसे राहुल का साथ पाकर एक पति के साथ ही एक परिवार भी मिल गया क्योकि जहाँ प्रिया के मायके में केवल उसके पिता थे वही राहुल का अपना पूरा हँसता खेलता परिवार था जिसमे उसके अलावा उसके मम्मी-पापा और एक छोटा भाई था ! वैसे तो राहुल का परिवार एक मध्यमवर्गीय परिवार था ! मगर फिर भी उसके घर में जरुरत की सारी चीजे मौजूद थी ! शुरुआत के दिनों में तो सबकुछ अच्छा चल रहा था और शुरू शुरू में जब कोई प्रिया की तारीफ भी करता तो राहुल को अपने आप पर गर्व महसूस होता! मानो इसका सारा श्रेय उसी को जाता हो जबकि जॉब और पैसा कमाने के चक्कर में वो इतना बिजी था की उसने अपने विवाह की सारी जिम्मेदारी अपने मम्मी-पापा को दे रखी थी ! हाँ लड़की फाइनल उसे करनी थी इसलिए वो केवल लड़की देखने जाता और अपनी शर्तो को हर लड़की के सामने रख देता! जैसी की शर्ते उसने प्रिया के सामने भी रखी थी! जिसे प्रिया ने सहर्ष स्वीकार कर लिया था और राहुल और प्रिया की शादी हो गयी!

कुछ महीनो तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चलता रहा! हाँ  राहुल और प्रिया में थोड़ी बहुत तकरार होती रहती जिसका कारण भी राहुल का गुस्सा ही था जो हमेशा उसकी नाक पर बैठा रहता था जिसके कारण  दफ्तर में भी उसका खौफ था और प्रिया भी उसका खौफ महसूस करती और इसीलिए जब कड़क आवाज में राहुल कुछ  कहता तो प्रिया चुपचाप उसकी हर बात मान लेती ! ऐसा नहीं था की राहुल नहीं चाहता था की घर में हमेशा खुशनुमा माहोल रहे !बल्कि वो तो सभी से बहुत प्यार करता और सबको खुश रखना चाहता था मगर उसका ग़ुस्सा उसके Control में नहीं था और इसकारण हर छोटी छोटी बातो पर उसका दिमाग ख़राब होता और वो चिल्लाने लगता!

शादी के कुछ दिन तो बड़े आराम से बीत गए मगर धीरे-धीरे साँस-बहु में हलकी फुल्की टकरार शुरू हो गयी जो वक़्त के साथ साथ बढ़ने लगी  फिर तो ये रोज का ही सिलसिला हो गया अब या तो प्रिया मम्मी के बारे में कुछ कहती तो कभी मम्मी प्रिया पर ताना कासी करती! वैसे तो राहुल इन सब बातो पर कम ही ध्यान देता मगर जब धीरे-धीरे बात बिगड़ने लगी तो राहुल भी अब इन सब बातो से परेशान रहने लगा! जिसका सीधा असर उसके काम पर ऐसा पड़ा की अपनी Sales Team  के Top Sales Person की गिनती में आने वाला राहुल पूरे महीने में एक से ज्यादा Sale नहीं कर पाया! राहुल की परेशानी अब उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी जिसे भापकर ही बॉस ने राहुल को रोककर साफ साफ कहा" यार राहुल क्या Problem अगर काम से Related कोई प्रॉब्लम हो तो बताओ और यार अगर तुम्हारी कोई पर्सनल प्रॉब्लम हो तो इसे जितना जल्द से जल्द हो सके सॉल्व  कर लो !
                         फिर बॉस ने बड़े प्यार से राहुल के सर पर हाथ रखते हुए कहा  याद रखो राहुल , हम सेल्स फील्ड में है यहाँ जो बेचता है उसी का सिक्का चलता है और सिर्फ उसी की इज्जत होती है तुम्हे भी इस बार किसी ने  कुछ नहीं कहा  तो इसका कारण भी तुम्हारा पिछले कई महीनो का बेस्ट परफॉर्मेंस है ! इतना बोलकर मुस्कुराते हुए राहुल के बॉस वहा से चले गए और राहुल भी अपना लटकता चेहरा लेकर घर लौट आया!

जब राहुल घर  पंहुचा तब प्रिया अपनी सास के साथ बाजार गई थी और घर में केवल राहुल के पापा थे जो उस वक़्त सोफे पर बैठे-बैठे अख़बार पढ़ रहे थे ! राहुल भी ख़ामोशी से अपने पापा के पास आकर बैठ  गया पापा की अनुभवी आँखो ने राहुल का चेहरा पढ लिया और फिर जैसे ही पापा राहुल के पास आए की राहुल एक छोटे बच्चे  की तरह पापा के कंधे पर सर रखकर रोने लगा और रोते -रोते ही उसने ऑफिस में हुई सारी बाते और उसके दुखी रहने का कारण भी पापा को बता दिया!

"तू बुरा बन जा " पापा ने केवल इतना कहा और राहुल का माथा चूमकर वहा से चले गए ! रात  भर राहुल पापा के  "तू बुरा बन जा" इस वाक्य  के बारे में सोचता रहा मगर उसे कुछ समझ न आया !

सुबह-सुबह जब राहुल ऑफिस के लिए तैयार हो रहा था तभी किसी बात को लेकर वह प्रिया पर जोर-जोर से चिल्लाने  लगा जिसे सुनकर राहुल के मम्मी पापा भी कमरे में आ गए ! पापा ने राहुल को चुप रहने का इशारा किया और प्रिया के सर पर हाथ फेरते हुए बोले "क्या हुआ बेटा "? क्या बात है ? मगर प्रिया ने कोई बात नहीं पापाजी केवल  इतना कहा और खामोश हो गई!

 अरे कुछ  क्या नहीं एक काम भी टाइम पर नहीं करती दिनभर बैठी रहती है  इस तरह राहुल, मम्मी पापा के सामने ही प्रिया पर चिल्लाने लगा और उसे ताने देने लगा! राहुल अभी प्रिया पर चिल्ला ही रहा था की मम्मी ने प्रिया का बचाव करते हुए राहुल को डाटना शुरू  कर दिया !
                                      " चुपकर राहुल, खुद तो हाथ से एक गिलास पानी तक नहीं लेता बेचारी प्रिया ही सबका ध्यान रखती है दिनभर सबकी सेवा करती रहती है और तू है की इसे ही ताने दे रहा है! मम्मी के मुख से अपने लिए ये बातें सुनकर प्रिया की आँखे भर आई जब की राहुल अब प्रिया को छोड़कर मम्मी से लड़ने लगा और बोला " मम्मी आप रहने दो प्लीज अपना काम करो जब देखो तब………………… और इससे पहले राहुल कुछ बोलता प्रिया जो अभी तक चुप-चाप होकर राहुल की डाट -फटकार और ताने  सुन रही थी एक दम से जोर से चिल्ला उठी  चुप रहो आप, जब देखो तब कुछ न कुछ बोलते रहते हो ,क्या बोल रहे हो ? किसके बारे में बोल रहे हो कुछ समझ भी आता  है "ये मेरी माँ है",माँ , समझे अपनी सारी अफसरी अपने दफ्तर में छोड़कर आया करो ख़बरदार जो कभी मम्मी पापा से ऊची आवाज में बात की तो और इतना कहकर प्रिया अपनी सास के गले लगकर रोने लगी !
तभी पापा राहुल का हाथ पकड़कर उसे कमरे से बाहर ले आये कमरे से बाहर निकलते वक़्त राहुल ने अपने पापा की तरफ देखा तो वे मुस्कुरा रहे थे क्योकि उनके बेटे ने उनकी बात का मर्म जो समझ लिया था!





Monday, 1 December 2014

लत लग गई -लग गई


सुबह सुबह की सैर वाकई बहुत अच्छी होती है और मेरे लिए तो ये कुछ ज्यादा ही अच्छी है! क्योकि मुझे ऐसा लगता है की दिन भर में एक वही समय होता है जब मेरा दिमाग Active होकर काम करता है!
वैसे भी जब में छोटा था तो अक्सर घरवाले कहा करते थे कि सुबह सुबह पढ़ाई किया कर सुबह सुबह का याद किया हुआ ज्यादा याद रहता है!फिर जैसे-जैसे मैं बड़ा होने लगा मुझे पता चला सुबह-सुबह घूमना ,योग करना ,Meditation करना,कसरत करना और भी न जाने क्या- क्या अच्छा होता है! धीरे-धीरे तो मुझे यही लगने लगा कि जब सभी कुछ सुबह-सुबह करना ही अच्छा होता है तो दोपहर में क्या केवल सोना अच्छा होता है !

खैर अब सब की बात मानकर सबकुछ तो नहीं कर सकते इसलिए मेरी आपको सलाह यही है की आप सुबह -सुबह वही काम करे जो आपको सबसे ज्यादा पसंद हो और अगर कुछ समझ न आये तो मुँह धोकर मेरा Blog पड़ने बैठ जाइये अच्छा है न मुझे Blog लिखने की अादत हो जाएगी और आपको पढ़ने की!

चलो अब आप Blog पढ़ने  बैठ ही गए हो तो मैं आपको आज की Morning walk News सुना ही देता हुँ !
तो आज जब में चुप-चाप अपने दोस्त राज के साथ घूम रहा था की अचानक ही राज के दिमाग की Tubelight जली और वो मुझसे इस बात को लेकर Discussion  ( वैसे हमारा Discussion cum Argument होता है ) करने लगा!
 हमारे यहाँ Government जो सफाई कराओ,हेलमेट पहनाओ जैसे नियम बनाती रहती है उन्हें Foreign Countries  की तरह Implement में क्यों नहीं ला पाती ! उसने सड़क पर चलते 2-4 Rule Breaking  के Live   Example भी बताये ! मगर जब मैने उसकी बात पर React नहीं किया तो खुद ही कहने लगा हाँ यार अपने यहाँ कोई सुधारना ही नहीं चाहता कितना भी करो 4 दिन जुम्मा-जुम्मा असर रहता है फिर वही  हाल बेचारी Government करे भी तो क्या करे?

 मैं अब भी खामोश था तो राज चिढ़ते हुए बोला" अबे कुछ तो बक मैं तुझसे ही बात कर रहा हुँ  मन में बड-बड  नहीं कर रहा बता तुझे क्या लगता है क्या कभी Government  की ये योजनाऍ Successful हो सकती है-अबे कुछ तो बक राज ने दोबारा चिढ़ते हुए कहा

मैं जनता था की अब तक वो अपने मन की सारी  भड़ास निकल चूका है तो मैने बिना उससे कुछ कहे Race-2 मूवी का गाना गुनगुना शुरू कर दिया " मुझे तो तेरी लत लग गई-लग गई जमाना कहे लत ये गलत लग गई मुझे तेरी ……………

मैने जैसे ही गाना शुरू किया की राज चिढ़कर वहा से जाने लगा तो मैने उसे रोका और उसके Discussion cum Argument का हिस्सा बनते हुए बोला देख,बात सिर्फ लत की होती है अब लत चाहे अच्छी हो या बुरी मगर अगर एक बार लोगो को लत लग जाती है तो लोग अपने आप वो काम करने लग जाते है!
अगर Government  भी चाहती है की लोग नियमो का पालन करे तो उन्हें पहले लोगो को इसकी आदत डालना होगी! एक बार आदत में आने के बाद लोग अपने आप मानने  लगेंगे! मेरे इस 2 min के छोटे से भाषण को सुनकर राज ने जो Expression बनाये वो मुझे इतना बताने के लिए काफी थे की उसे मेरी बात बिलकुल भी समझ नहीं आई है !

फिर मैने उस Techno-Friendly  कीड़े को उसी की भाषा में समझाया की देख सब आदत की बात होती है ! सन 2000 में Mobile आया,2007 में Facebook आया,2011 में Android Mobile और What'app आए और अभी इस साल जब से Selfi  की demand Market में बढ़ी तब से ऐसे Mobile आ गए की आँखे झपकाओ और Selfi Ready तो तुझे क्या लगता है companies ने क्या किया केवल इतना ही ना की पहले कुछ Rate कम रखे थोड़ा बहुत Marketing Promotion किया और आज देख ये सभी हमारी Life के कितने Imp part बन गए है!
अब तू देख अब लोग Mobile ,Facebook,What'app,Selfi  इन चीजो के बिना अपना जीवन अधूरा मानते है जैसे आज से 15 साल पहले जब ये सब चीजे नहीं थी तो कोई जीता ही नहीं था मगर आज हालत ये है की बंदा खाने के बिना रह सकता है,घर में अकेला रह सकता है पर अपने Mobile से दूर रहने का दर्द कोई नहीं सह सकता !

अबे तू दूर क्यों जाता है अपने आप को ही ले  क्या आज तू FB, What'app के बिना रह सकता है!
तेरी खुद की हालत ये है की Photo खिचवाने से पहले तुझे उसे post करने की जल्दी रहती है! कभी-कभी तो मुझे शक होता है की तू Photo भी अपने लिए खिचवाता है या Facebook Likes के लिए!

अबे क्या बोल रहा है Mobile और Helmet में कोई Comparison  हो ही नहीं सकता Mobile Mobile है और  Helmet,Helmet और अगर ऐसा कुछ है तो बता राज के Expression साफ बता रहे थे की उसको मेरा यु Mobile को Helmet से Compare करना अच्छा नहीं लगा !

यार देख,जब Mobile को Market में चलाना था तो company ने क्या किया उनके Rate  कम किये Customer  को Mobile के नए-नए फायदे बताये Market  होने पर Mobile अपने आप बिकने लगा वैसे ही अभी तू देख जब से Helmet भी Compulsory बनाने की मुहीम शुरू हुई है तब से शहर के हर फुटपाथ पर देख Helmet बिकने शुरू हो गए है!अगर Government  भी कुछ ना करे बस उसे सिर्फ1साल के लिए ही100 % सबके लिए (जो 2 Wheeler चला  रहा हो ) Compulsory कर दे तो अपने आप सबकी आदत पड जाएगी फिर आप नहीं भी कहोगे तो भी लोग बाजार से खरीदकर पहन ही लेंगे !

हाँ जैसे कंपनी अपने Rate कम करती है ताकि आपको शुरू में उसकी आदत लग जाये वैसे ही सरकार को भी पहले Fine जरूर 25-50 रुपए रखने होगे उससे फायदा ये होगा कि लोग 25-50 रुपए Fine होने से Policewalo को side में ले जाने से तो Fine भरना ही ठीक समझेगे तो Corruption कम होगा और हमारे नेताओ को भी कोई 25-50 रुपयो बचाने  के लिए परेशान नहीं करेगा और सोचेगा रोज-रोज लेट होने और 25-50 देने से तो अच्छा है की कही फुटपाथ से ही सही 300-500 का एक Helmet खरीद के पहन लेता हूँ जैसा का अपन दोनों ने कल सोचा और हेलमेट पहनने लगे !

इतना कहने के बाद में दुबारा लत लग गई गाना गुनगुनाने लगा और राज से बोला देख गाना एक दम सही है अगर किसी को एक बार लत लग जाये तो वो इतनी आसानी से नहीं छूटेगी इसलिए अगर Government सच में चाहती है तो सिर्फ एक बार लोगो को उसकी आदत डाल दे और जैसे Company हमेशा बताती रहती है की हमारे Product के बिना तो आपका जीवन अधूरा है और धीरे-धीरे Customer  भी ये ही  मानने लगता है वैसा ही अगर Government भी करने लगे तो आज नहीं तो कल ये हो ही जायेगा की सब लोग Helmet पहनने लग ही जायेगे और आपको उन्हें जबरन पहनाना  नहीं पड़ेगा बल्कि उन्हें पहनने से मना किया तो उन्हें Problem होगी !

जैसे आज FB ,What'app जैसी SNS site अगर अपनी Services बंद कर दे तो लोग आधे पागल हो जायेगे वो उनके लिए जरुरी नहीं है मगर अब उन्हें इसे Use करने की लत पड चुकी है और ये लत है एक बार अगर लग गई तो फिर आसानी से नहीं छूटती!

अब यही देखो ना मुझे Blog  लिखने की लत लग है और आपको उसे झेलने की और ये लत है भई आसानी से छूटेगी नहीं!


















Sunday, 16 November 2014

"Icecream खिलाओ पैसे बचाओ"


                                                   


आज में आपसे सुबह-सुबह की नहीं बल्कि दोपहर में Icecream Parlor में हुए Discussion  की बात करुगा !
 ताकि आपको ये न लगे की मैं सुबह के बाद गायब कहा हो जाता हुँ ! 

तो कल दोपहर को मैं शॉपिंग मॉल में शॉपिंग कर रहा था की अचानक ही मेरे स्कूल का दोस्त राज मुझे वहा मिल गया एक दूसरे को इतने समय बाद एक दम अचानक देखकर पहले तो हम ऐसे चिल्लाये की सारा मॉल हमें ही देखने लगा और एक दो लोगो ने अपने हाथो में रखे बिस्कुट और मैगी के पैकेट भी गिरा दिए ! दरअसल हमारे चिल्लाने का Main Reason सिर्फ इतना था की हम 2 सालो बाद अचानक मिले थे! वैसे तो राज मेरे घर से मात्र 2 KM की दुरी पर ही  रहता है मगर आज की Life में 200 km की travelling आसान है 2 km की नहीं, इसलिए हमें 2 km travel करने में 2 साल लग गए !

फिर बातो ही बातो में राज ने बताया की Next month उसकी Band बजने वाली है (I Mean शादी होने वाली है)
मैने उसे Congratulate किया! मगर थोड़ी ही देर बात करने पर मुझे समझ आ गया की राज कुछ परेशान है! मुझसे रहा नहीं गया और मैने यु ही मजाक में कहा क्या हुआ बे शादी के पहले क्यों मुँह लटका रखा है ये तो शादी के बाद का Scene है !

अरे नहीं यार वो बात नहीं है दरअसल 3 साल हो गए यार जॉब करते करते मगर मेरे पास सेविंग के नाम पर मात्र बैंक में 20,000 रुपए है और10,000 सालाना की  Insurance Policy! यार कितना भी करू पैसे बचते ही नहीं और जो बचत करता हु वो कहा जाती है बाद में समझ नहीं आती ! जब अभी ही पैसे नहीं बच रहे तो आगे कैसे काम चलेगा यार समझ ही नहीं आता कैसे बचत करू और कितनी करू और इसतरह राज ने एक ही साँस में मुझे दुखी होने का कारण बता दिया !

मैने उसे बताया देख तू जिन्हे Investment  कह रहा है वो Actual में Investment की गिनती में नहीं आते!

 मतलब:मैं कुछ समझा नहीं :- राज ने कहा

 देख, दरअसल बचत 4 प्रकार की होती है! 4 % 10 %15 % और 20 % वाली बचत और हर एक  बचत के अपने अपने फायदे और नुकसान होते है!

हाँ कल मैने तेरा Blog " सब्जी भाजी में आग लगी है " पड़ा उसमे भी तूने इससे Related ही कुछ लिखा था ना

 मैने केवल हाँ में गर्दन हिला दी !

देख अभी अभी तु कह रहा था न की तूने 10,000 सालाना की प्रीमियम भरना Start किया है! जानता है 10,000 हर साल डालने पर 25 सालो बाद एक बचत तुझे 4,50,000 देगी जबकि एक बचत 60,00,000 देगी ! जबकि तू दोनों CASES में 2,50,000 (10,000*25) ही देगा- मैने कहा 


चल बे क्या फेकता है अगर ऐसा होता तो हर कोई 60,00,000 देने वाली बचत पर ही पैसा लगाता कोई पागल ही होगा जो इस 4 % वाली बचत पर अपना पैसा डूबने के लिए लगाएगा !

हाँ  तू सच बोल रहा है एक पागल तो मेरे सामने ही खड़ा है!

क्या मतलब और अगर ऐसा है तो बोल में अभी सारा पैसा 20 %वाली बचत पर लगा देता हुँ - राज तुरंत पैसा लगाने को राजी हो गया !

बस यही पर तो सब फ़िसल जाते है जहा बड़ा Return सुना नहीं की सारा पैसे लगाने दौड़ पड़ते है-मैने उसे बताया !

अब  मैं राज के लिए कोई Financial Consultant  तो था नहीं जो वो मुझे भाव देता तो वो खुद ही बोल पड़ा चल अब ज्यादा भाव खाने की जरुरत नहीं है सामने वाले  Icecream Parlor में जा और टेबल पकड़कर बैठ जा मैं आइसक्रीम लेकर आता हुँ एक आइसक्रीम खा और बोल क्या बोलना चाहता है !

मैने भी उसकी बात मानी और एक कोने की टेबल पकड़कर बैठ गया और राज औरआइसक्रीम का इंतज़ार करने लगा !  
                                                     



2 मिनट बाद राज आइसक्रीम लेकर आया और मुझे Icecream थमाते हुए बोला बेटा चल अब शुरू हो जा
मैने पहले Icecream खाना शुरू किया फिर उसे बताना की देख बचत 4 प्रकार की होती है और अब में तुझे एक एक कर सबके फायदे नुकसान बताता हुँ  ताकि तू Easily Decide कर सके की तेरे लिए कौन सी बचत सही है!
  • 4 % वाली बचत :  इस बचत को असल मायने में बचत कहना सही नहीं है क्योकि ये वो पैसा है जो या तो आपके जेब में Plastic Card के रूप में है! जो आप ATM  से जब चाहे तब निकाल लेंगे या इस बचत को अपने घर के किसी कोने में आपने सहेजा है !
  • फायदा :  अगर रातो रात जरुरत पद गयी तो काम आएगा यही पैसा अगर बच गया तो 
  • नुकसान : अगर आप केवल यही बचत करते रहेंगे तो बाजार की हर सेल पर टूट पड़ेंगे !
  • 10 % वाली बचत : ये वो बचत है जो ज्यादातर 50 साल या उससे अधिक उम्र के लोग करना पसंद करते है! जिसमे आपका पैसा 100 % Safe है! आपको आपका पैसा कभी भी मिल जाता है जब आपको चाहिए और आपका नुकसान भी बीच में पैसा निकालने पर केवल ब्याज का ही होगा "Bank FD " इसका सबसे Best Example है!
  • फायदा :  कम ब्याज से ही सही मगर आपका पैसा 100 % Safe है इतना Safe है की बैंक लुट जाने पर भी बैंक आपका पैसा देने से मना नहीं कर सकती और इसमें कोई Financial बुद्धि भी नहीं लगाना पड़ती बस बैंक जाओ एक फार्म भरो और Online ज़माने में 10 मिनट बाद बैंक FD आपके हाथ में जिसमे ये भी Mention रहेगा की एक साल बाद आपको कितना पैसा मिलने वाला है -- है न मजेदार 
  • नुकसान :  Normally देखा जाये तो इसमें कोई नुकसान नहीं है मगर कई लोग अपने फालतू खर्च बढ़ने पर तुरंत इसका इस्तेमाल करते है और दूसरा ये की एक लम्बे समय बाद भी ये आपको केवल महगाई जितना ही Return देगा !
  • 15 % वाली बचत : इस बचत में आपको अपनी थोड़ी बहुत Financial IQ use करनी पड़ती है और Calculative Risk भी होता है !
  •   फायदा :  जैसा मैने कहा इसमें केवल थोड़ा सा Financial IQ रखने पर Risk Calculated हो जाता है और    एक लम्बी अवधि तक यदि आप इससे रखते है Return भी बढ़िया रहता है !
  • नुकसान : वैसे तो इसमें भी कोई नुकसान नहीं है अगर आप अपना Financial IQ इस्तेमाल करो तो हाँ ये जरूर है की इसमें निवेश कम से कम 2-3 सालो के लिए Block मानना चाहिए और यही मानकर निवेश करना चाहिए की जल्दी निकालने पर आपका नुकसान बढ़ेगा! (Mutual Funds इसका सबसे Best Example है! )
  • 20  % वाली बचत :इस बचत को आप तब तक न करे जब तक आप काफी किताबे निवेश पर न पढ़ चुके हो या Mentally  कमाने के साथ खोने के लिए भी तैयार हो क्योकि इसमें बिना सोचे समझे लगाया गया पैसा आपका डूबेगा ही ! इस बचत का  निवेश 5-10 सालो से लेकर 10-25 सालो के लिए हो सकता है ! Return काफी ज्यादा है मगर इसमें आपको हमेशा अपने ऑख और कान खुले रखने की जरुरत है ! यदि आप पैसे से सच में प्यार नहीं करते और उसे खोने से डरते है तो मेरी सलाह है आप इस निवेश में न उतरे ! ( Investor's share, property are the best example for these type of investment )
अब ये मत कहना की हमने भी रहने के लिए अपना घर ख़रीदा है क्योकि रहने के लिए घर खरीदने और Invest  करने के लिए घर खरीदने में जमीन आसमान का अंतर है जो अपन बाद में कभी discuss करेंगे !
  • फायदा :  इस बचत से मिलने वाला Return बाकि बचतों से मिलने वाले Return  के मुकाबले काफी ज्यादा है और ये यक़ीनन एक लम्बी अवधि (लगभग 25-30 साल) के बाद आपकी हो रही उस वक़्त की Income से कही ज्यादा होगी!
  • नुकसान : इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है की इसमें आपको हमेशा ध्यान रखना पड़ता है,पता करना होता है, कहा निवेश करना है और 10 सालो बाद क्या होगा ऐसे Future Prediction करने की जेहमत उठानी पड़ती है और अगर आपने इसतरह के निवेश करने के बाद उन लोगो की बात मानी जो इस तरह के निवेश नहीं करते तो आप निश्चित ही अपना पैसा खो बैठोगे!

 आखिर इतना ज्ञान झाड़ने के बाद मैं खामोश होकर बैठ गया तो राज बोला अरे ये तो सब ठीक है तू तो मुझे ये बता की एक सही Investment क्या होना चाहिए !

चल इसे एक Example से समझ : मैने Icecream Cup में कोने में दबी बची हुई Icecream खाते-खाते उसे बताया

 अगर किसी ने 100 रुपए कमाए:

     Type
   Amount
                                       Reason
Daily Expenses
60
 अपने Daily Expenses में लगा क्योकि भूखे मरकर पैसा बचाना भी बेकार है अच्छा खाओ !
4%
10
 ऐसा पैसा जो आपके घर परिवार की मुसीबत में तुरंत काम आए जैसे Accident, अचानक आई विपदा !
हाँ तेरा लिया Insurance, Mediclaim भी इसी Category में आते है  
10%
10
 ऐसा पैसा जिसकी जरुरत आपको पता है की इसकी जरुरत आपको एक या दो साल बाद पढने ही वाली है !
15%
10
 आपकी थोड़ी लम्बी Planning जिसमे आपके Long Term Plan शामिल हो !
20%
10
 आपके और आपके Future के Financial Freedom के लिए !



अच्छा सुन ,  ये भी लोगो के हिसाब से थोड़ा बहुत बदलता रहता है और हाँ जैसे तू अभी थोड़ी देर पहले मेरे एक  बारबार  बोलने पर सारा पैसा 20 % बचत पर लगाने को राजी हो गया! इसलिए में दोबारा कहना चाहुगा की 20 % वाली बचत केवल देखने में ही अच्छी है !मगर उसमे निवेश तब तक मत करना जब तक तू निवेश को समझने न लग जाये क्योकि इसमें पैसा खोने का डर भी होता है अगर तूने बिना सोचे समझे निवेश किया तो जो बाकी तीनो में नहीं होता या न के बराबर होता है !

इसलिए मेरी तुझे यही सलाह है की तू 4% वाली बचत को बचत मत मान ! 10% और15 % वाली बचत से बढ़ते हुए 20% वाली बचत पर पहुंच और ये तब करना जब तू Mentally पैसा कमाने  के लिए थोड़ा अधिक वक़्त रुकने और Investment  को समझने  के लिए तैयार हो !

चारो बचत मात्र 1000 रुपए से भी शुरू कर मगर पहले ये तय कर की तेरी सोच कौन सी है अगर 100 % Safe  खेलना है तो 10% ही बेहतर है!  हाँ अगर थोड़ा खेल का मजा लेना हो तो 15% वाली बचत पर जा और आगे वाली बचत के बारे में तो तू जानता ही है !

Remember,

Investment is a Game अगर Game में मजा आता हो तो ही खेलना वरना 10-12 % वाली बचत पता करो और आराम से रहो !  

और  : मेरे दोबारा खामोश होते ही राज ने कहा 

अबे अब और क्या मेरा भाषण और Icecream Finally दोनों खत्म हो गए है!

 तो अब तू चल और सुन' यहाँ Icecream Parlor से बचत चालू मत कर, जा और जाकर पहले  Bill  Pay करके आ और राज कुछ मुँह बनाता हुआ, हँसता हुआ Bill Counter की और हो लिया !














Thursday, 13 November 2014

सब्जी भाजी में आग लगी है



आज सुबह- सुबह मैं अपने पापा ले साथ Morning Walk  कर रहा था और हम यही discuss कर रहे थे की पुराने ज़माने में जिन चीजो में निवेश होता था वो आज भी कितनी काम की है और आगे आने वाले सालो में भी उनकी value बढ़ेगी ही ,घटेगी नहीं !

जैसे पहले के लोग जमीन खरीदते थे और पापा ने बताया की पहले के लोग अपने सोने  को जमीन में गाढ़कर  रखते थे ! जब हम बाते कर रहे थे तो मुझे एहसास हुआ की पहले लोग कोई MBA वगैरह नहीं करते थे फिर भी उनमे निवेश की कितनी समझ थी ! वो अपना निवेश इतनी बेहतरीन जगह करते थे की मंहगाई के घोड़े उन्हें छु भी नहीं पाते!  इसीलिए मंहगाई उन पर इतना असर नहीं करती जितना अब करती है! क्योकि उनके निवेश जहा उन्हें कम से कम 15-20% Return देते वही Inflation Rate तब भी Average 6-8% से  ज्यादा नहीं बढ़ता था और बातो ही बातो में ये Logic समझ आया की लोग अमीर,गरीब और मध्यमवर्गीय क्यों होते जा रहे है ?  दरअसल उनकी कमाई ही कम ज्यादा नहीं बल्कि उनके निवेश में भी जमीन आसमान का अंतर है ! जिन्होंने उन्हें अमीर और गरीब बनाया है !


सही भी है न यार, जब एक साल बाद जो पेट्रोल आप आज 100 रुपए में खरीदते हो उसी का दाम110 रुपए हो जायेगा! यानि उसमे 10% की वृदि होगी और तब भी आपके 100 रुपए आपको केवल 105 रुपए ही दिलाएगें तो वो Indirectly आपको अमीर बनने में नहीं बल्कि गरीब बनाने में अपना महत्वपुर्ण योगदान निभाएंगे !

 और तभी मुझे Investor's  का बनाया "THE RULE OF 72 REWRITTEN" सही लगने लगा !

जिसके अनुसार अगर आपके पास 1000 रुपए है और आप जानना चाहते है की वो 2000 कब बनेगे तो अपनी ROI (RATE OF INTEREST) को 72 से Divide कर दो !

Means IF,
  •    ROI is 4% :>   18  Years
  •    ROI is 10% :>  7.2 Years
  •    ROI is 15% :>  4.8  Years
  •    ROI is 20% :>  3.6  Years
अब समझ आया 1000 को 2000 बनाने में 18 साल भी लग सकते है और 3.6 Year भी और अगर मंहगाई ही  6-8% से बढ़ती रही और आपके सारे Return 4 % से तो आज नहीं तो कल आपका गरीब होना तय है!  

 
अब एक बच्चो वाली बात :----  

 आज से तक़रीबन 8 साल पहले Year 2006 में जब मैं खिचड़ी लाता था तो वो 7 रु/प्लेट थी जब की 2014 में वही खिचड़ी  20 रु/प्लेट हो गई ! अगर सभी चीजो में दाम इसी तरह बढ़े और आपका निवेश Insurance और बैंक खातों के Return की  तरह 4 % बढ़ा तो  मंहगाई आपको छुएगी ही !यहाँ बात 7 रु या 20 रु की खिचड़ी की  सोचकर Avoid मत करो क्योकि यहाँ Inflation 300% बढ़ा है वो भी केवल 8 सालो में !


मंहगाई ऐसे ही बढ़ती है और इसलिए हम कहते है की सब्जी भाजी में आग लगी हुई है! दरअसल ऐसा  इसलिए है क्योकि हम निवेश के प्रति जिम्मेदार नहीं है !





Wednesday, 5 November 2014

"बाप गलत या बेटा "


आज सुबह सुबह अख़बार में एक कहानी पढ़ी की एक पिता ने बहुत मेहनत करके अपना पेट काटकर अपने बच्चे को पढ़ाया लिखाया! उसकी खातिर अपना घर बार छोड़ा और आज उसी बच्चे ने उन्हें शहर में अकेले    किसी नौकर के भरोसे छोड़ विदेश में अपना घर बसा लिया! कहानी के अंत में लिखा था की पिता रोते हुए कहता है"जिसके लिए हमने संसार को छोड़ा आज वो ही बेटा हमे छोड़ गया! उसने ये तक नहीं सोचा की अब हम किसके भरोसे जिएंगे!
कहानी पढ़कर मुझे 2 महीने पहले अपने दोस्त राज के घर का वो Drama याद आ गया! जहाँ मैं एक मूकदर्शक बनकर खड़ा केवल ये विचार कर रहा था की आखिर गलत कौन है! मुझे याद आया की 2 महीने पहले ही तो राज के घर में भी यही तमाशा हुआ था और कुमार अंकल ( राज के पापा ) निराश होकर सोफे पर बैठे हुए थे!
 राज मेरे बचपन का दोस्त है और इसलिए मैं राज के घर के सभी लोगो को जानता हुँ! वैसे भी Nuclear Family  के ज़माने में घर में लोग होते ही कितने है! पति-पत्नी और बच्चे ( वो भी दो नहीं एक क्योकि आजकल का नया नारा है बच्चा  एक ही अच्छा या बच्ची एक ही अच्छी ) तो उन कुल मिलकर 3 लोगो के परिवार को मैं बड़े अच्छे से जानता था! कुमार अंकल एक बैंक में मैनेजर थे! आस पास भी उनका बड़ा रुबाब था! वही आंटी हाउसवाइफ तो थी मगर साथ ही कॉलोनी की कुकिंग एक्सपर्ट भी थी! पुरे एरिया में उनके जैसी कुकिंग कोई नहीं कर पाता और राज तो था ही शुरू से मास्टरमाइंड तो इस तरह पूरी फैमिली की कॉलोनी में एक अलग ही इमेज बनी हुई थी !

हाँ साल में 2-3 बार जरूर राज के घर में और भी लोग दिखाई देते! हां साल में 2-3 बार जरूर  राज के घर खूब धूम धड़ाका रहता या किसी साल,साल में 2 -3 बार शांति रहती! धूम धड़ाका तब होता जब गाँव से उनके घर कोई मिलने आता और शांति तब जब वो अपनी कार से गाँव रवाना हो जाते ! पूरी कॉलोनी को यही लगता की यही एक जोशीला परिवार कॉलोनी में रहता है !
लेकिन आज जब मैं राज के घर गया तो ऐसा लगा मानो सभी का जोश ठंडा हो गया है और सभी अभी-अभी लड़-झगड़कर Free हुए है! मुझे बड़ा आशचर्य हुआ क्योंकी राज तो कल ही 1 साल बाद घर वापस आया और उसके आने के बाद घर का ये माहौल वाकई आश्चर्यचकित करने वाला था ! राज तो वैसे भी पिछले 5 सालो से Mumbai में किसी MNC company में जॉब कर रहा था! और जिसके चलते वो साल में 6 महीने India में तो 6 महीने Foreign में रहता और इसलिए अब तो हमारे ग्रुप ने भी उसका नया नाम "आधा हिंदुस्तानी" रख दिया था!

राज के घर का माहोल बता रहा था की अभी-अभी लम्बी बहस खत्म हुई है और ये तूफान के बाद वाली शांति है! वैसे तो वो राज के घर का मैटर था मगर फिर भी मुझसे रहा नहीं गया और में Unty और uncle  को रोता छोड़ राज को लेकर उसकी छत पर आ आया और अंकल के इस तरह रोने का reason पूछने लगा ! पहले तो 10 Minute तक राज मूर्ति बनकर खड़ा रहा! फिर मैंने ही बाग़बान की स्टोरी चालू कर दी !
देख यार कुमार Uncle retired हो गए है ,अकेलापन महसूस करते होगे! वैसे भी तेरे बिना उनका है ही कौन ? बुढ़ापे में उनका धयान कौन रखेगा यही बाते उन्हें सताती होगी और फिर भी बहुत सी नसीहत मैंने राज को बिन मागे दे डाली !

पहले तो वो चुपचाप सुनता रहा मगर जैसे ही मैंने आखिर में उसे वापस आने को कहा या दूसरे Option  के रूप में Uncle-Unty को साथ ले जाने को कहा तो भड़क गया! कहने लगा  देख यार " मैंने पापा से कहा आप आराम  से यहाँ रहो! मैं आता जाता रहुगा! आप कहेंगे तो पैसे भी भेज दुगा! वैसे तो पापा की पेंशन भी बहुत है! तब भी अगर कहेंगे तो मुझे पैसे भेजने में भी कोई प्रॉब्लम नहीं है! तू मानेगा नहीं मैने तो मम्मी के रोने पर यहाँ तक कहा की आप चलो मगर आप दोनों वहाँ बिलकुल भी रोक-टोक नहीं करोगे तो में वही अपने फ्लैट के पास आपके लिए भी कोई फ्लैट और नौकर का इंतज़ाम कर दुगा और10-15 दिनों में आता जाता रहुगा !
राज इतने ग़ुस्से में बोले जा रहा था की एक पल को तो में डर ही गया! फिर भी मैंने थोड़ी हिम्मत करके कहा "मगर राज, ये तो गलत है ना तू ही सोच, जो तू बोल रहा है क्या ये ठीक है ? मैने इतना कहा की वो दोबारा भड़क गया  ही चुप करते हुए बोला  "अरे तू चुप कर यार, तुझे नहीं पता ऐसा ही होता है,तू ही न जाने कौन सी दुनिया में जी रहा है! देख में जब छोटा था तो पापा की जॉब लगी!पापा गाँव से शहर आये उनके हिसाब से गाँव में रहने वाले मेरे दादा-दादी Old फैशन और पुराने ख्याल के थे! पापा के हिसाब से गाँव में कोई Scope नहीं था! इसलिए वो हमारी खातिर शहर आ गए मैंने भी मेरे दादा-दादी को कभी हमारे साथ रहते नहीं देखा! बस साल में दो तीन बार या तो हम चले जाते या वो आ जाते तो मजा आता! मगर अगर वो मेहमान की तरह चार दिन में न जाये तो मुझे क्या पापा तक को भी Problem हो जाती! गाँव जाते तब भी पापा मुझे बताते की हम Modern हो गए है! ये सब गाँव के देहाती है! तो मुझे तो बचपन से यही समझ आया की कामयाबी या बड़े जॉब या बिज़नेस के लिए बड़ी जगह आना चाहिए! साथ साथ पुराने रिश्ते तोड़कर नए रिश्ते बनाना चाहिए! ये मैने मेरे पापा से ही सीखा और जब उस वक़्त थोड़े Modern होने पर पापा  ही अपने पापा को नहीं झेलते और अपने साथ नहीं रखते तो आज Ultra Modern  होने पर आज मैं पापा के साथ नहीं रहना चाहता तो कौन सा पाप कर रहा हु! वैसे भी तो पापा हमेशा कहते रहते है! हमने अपना सारा जीवन तुम्हारी खुशियो पर ही कुर्बान किया है तो आज क्यों वो मुझे मेरी ख़ुशी के लिए अपने से दूर नहीं रहने देते ! मगर नहीं, जब से वापस आया हुँ!  बस पीछे पड़े हुए है वापस आ जा अब में रिटायर हो गया हु! मैं तो उनकी बाते सुन-सुनकर परेशान हो गया! मैंने तो साफ़ कह दिया मैं  नहीं आऊगा! Priya भी आना नहीं चाहती ! मैंने पापा से कहा भी की आप बोलो तो मैं हर महीने कुछ पैसे भिजवा दू ,नौकर Appoint  कर लो मैं उसका पेमेंट कर दुगा!  इतना कहा की पापा भड़क गए !




अरे इतना तो कर रहा हु आप ने तो कभी इतना भी नहीं किया होगा अपने पापा  के लिए बस इतना कहा की पापा को मिर्ची लग गयी! चिला-चिल्लाकर कर बोलने लगे! जा यहाँ से मुझे तेरी जरुरत नहीं!
 फिर तू आया तब सोफे में मुँह डालकर रोने लगे और मम्मी ने तो जैसे रोने में वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल किया है ! चार दिन के लिए आया था! यार सारा मूड Upset करके रख दिया अब दो दिन में ही जा रहा हुँ !

मुझे अब कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या बोलू और इससे पहले में कुछ सोच समझ पाता राज ही दोबारा बोल पड़ा !
चल तू ये सब छोड़ ये बता आज रात का तेरा क्या प्रोग्राम है ! विजय और विनोद को मैंने पार्टी के लिए बुलाया है! चल मिलकर पार्टी करते है ! वैसे भी कल Morning में मेरी Flight है !

पहले तो उसकी पार्टी की बात को सुनकर मैं अवाक् रह गया! फिर थोड़ी देर बाद मुझे वो भी थोड़ा सही लगने लगा ! जब उसके पापा  अपने Career के लिए अपने माँ-बाप को छोड़ सकते है! तो वो छोड़ रहा है तो उन्हें क्यों प्रॉब्लम हो रही है! उन्हें प्रॉब्लम की जड़ को आज नहीं 30 साल पहले पकड़ना था !

 हालांकि मैं आखिर तक decide नहीं कर पाया की आखिर राज और उसके पापा में गलत कौन है! हाँ मुझे इतना जरूर समझ आ गया की ये आज कल वापस आने वाला है राज के बेटे के रूप में मगर मैने अब उससे कुछ नहीं कहा और हम रात को पार्टी करने चलते है बोलकर वहा से चला गया!!