आज सुबह सुबह अख़बार में एक कहानी पढ़ी की एक पिता ने बहुत मेहनत करके अपना पेट काटकर अपने बच्चे को पढ़ाया लिखाया! उसकी खातिर अपना घर बार छोड़ा और आज उसी बच्चे ने उन्हें शहर में अकेले किसी नौकर के भरोसे छोड़ विदेश में अपना घर बसा लिया! कहानी के अंत में लिखा था की पिता रोते हुए कहता है"जिसके लिए हमने संसार को छोड़ा आज वो ही बेटा हमे छोड़ गया! उसने ये तक नहीं सोचा की अब हम किसके भरोसे जिएंगे!
कहानी पढ़कर मुझे 2 महीने पहले अपने दोस्त राज के घर का वो Drama याद आ गया! जहाँ मैं एक मूकदर्शक बनकर खड़ा केवल ये विचार कर रहा था की आखिर गलत कौन है! मुझे याद आया की 2 महीने पहले ही तो राज के घर में भी यही तमाशा हुआ था और कुमार अंकल ( राज के पापा ) निराश होकर सोफे पर बैठे हुए थे!राज मेरे बचपन का दोस्त है और इसलिए मैं राज के घर के सभी लोगो को जानता हुँ! वैसे भी Nuclear Family के ज़माने में घर में लोग होते ही कितने है! पति-पत्नी और बच्चे ( वो भी दो नहीं एक क्योकि आजकल का नया नारा है बच्चा एक ही अच्छा या बच्ची एक ही अच्छी ) तो उन कुल मिलकर 3 लोगो के परिवार को मैं बड़े अच्छे से जानता था! कुमार अंकल एक बैंक में मैनेजर थे! आस पास भी उनका बड़ा रुबाब था! वही आंटी हाउसवाइफ तो थी मगर साथ ही कॉलोनी की कुकिंग एक्सपर्ट भी थी! पुरे एरिया में उनके जैसी कुकिंग कोई नहीं कर पाता और राज तो था ही शुरू से मास्टरमाइंड तो इस तरह पूरी फैमिली की कॉलोनी में एक अलग ही इमेज बनी हुई थी !
हाँ साल में 2-3 बार जरूर राज के घर में और भी लोग दिखाई देते! हां साल में 2-3 बार जरूर राज के घर खूब धूम धड़ाका रहता या किसी साल,साल में 2 -3 बार शांति रहती! धूम धड़ाका तब होता जब गाँव से उनके घर कोई मिलने आता और शांति तब जब वो अपनी कार से गाँव रवाना हो जाते ! पूरी कॉलोनी को यही लगता की यही एक जोशीला परिवार कॉलोनी में रहता है !
लेकिन आज जब मैं राज के घर गया तो ऐसा लगा मानो सभी का जोश ठंडा हो गया है और सभी अभी-अभी लड़-झगड़कर Free हुए है! मुझे बड़ा आशचर्य हुआ क्योंकी राज तो कल ही 1 साल बाद घर वापस आया और उसके आने के बाद घर का ये माहौल वाकई आश्चर्यचकित करने वाला था ! राज तो वैसे भी पिछले 5 सालो से Mumbai में किसी MNC company में जॉब कर रहा था! और जिसके चलते वो साल में 6 महीने India में तो 6 महीने Foreign में रहता और इसलिए अब तो हमारे ग्रुप ने भी उसका नया नाम "आधा हिंदुस्तानी" रख दिया था!
राज के घर का माहोल बता रहा था की अभी-अभी लम्बी बहस खत्म हुई है और ये तूफान के बाद वाली शांति है! वैसे तो वो राज के घर का मैटर था मगर फिर भी मुझसे रहा नहीं गया और में Unty और uncle को रोता छोड़ राज को लेकर उसकी छत पर आ आया और अंकल के इस तरह रोने का reason पूछने लगा ! पहले तो 10 Minute तक राज मूर्ति बनकर खड़ा रहा! फिर मैंने ही बाग़बान की स्टोरी चालू कर दी !
देख यार कुमार Uncle retired हो गए है ,अकेलापन महसूस करते होगे! वैसे भी तेरे बिना उनका है ही कौन ? बुढ़ापे में उनका धयान कौन रखेगा यही बाते उन्हें सताती होगी और फिर भी बहुत सी नसीहत मैंने राज को बिन मागे दे डाली !
पहले तो वो चुपचाप सुनता रहा मगर जैसे ही मैंने आखिर में उसे वापस आने को कहा या दूसरे Option के रूप में Uncle-Unty को साथ ले जाने को कहा तो भड़क गया! कहने लगा देख यार " मैंने पापा से कहा आप आराम से यहाँ रहो! मैं आता जाता रहुगा! आप कहेंगे तो पैसे भी भेज दुगा! वैसे तो पापा की पेंशन भी बहुत है! तब भी अगर कहेंगे तो मुझे पैसे भेजने में भी कोई प्रॉब्लम नहीं है! तू मानेगा नहीं मैने तो मम्मी के रोने पर यहाँ तक कहा की आप चलो मगर आप दोनों वहाँ बिलकुल भी रोक-टोक नहीं करोगे तो में वही अपने फ्लैट के पास आपके लिए भी कोई फ्लैट और नौकर का इंतज़ाम कर दुगा और10-15 दिनों में आता जाता रहुगा !
राज इतने ग़ुस्से में बोले जा रहा था की एक पल को तो में डर ही गया! फिर भी मैंने थोड़ी हिम्मत करके कहा "मगर राज, ये तो गलत है ना तू ही सोच, जो तू बोल रहा है क्या ये ठीक है ? मैने इतना कहा की वो दोबारा भड़क गया ही चुप करते हुए बोला "अरे तू चुप कर यार, तुझे नहीं पता ऐसा ही होता है,तू ही न जाने कौन सी दुनिया में जी रहा है! देख में जब छोटा था तो पापा की जॉब लगी!पापा गाँव से शहर आये उनके हिसाब से गाँव में रहने वाले मेरे दादा-दादी Old फैशन और पुराने ख्याल के थे! पापा के हिसाब से गाँव में कोई Scope नहीं था! इसलिए वो हमारी खातिर शहर आ गए मैंने भी मेरे दादा-दादी को कभी हमारे साथ रहते नहीं देखा! बस साल में दो तीन बार या तो हम चले जाते या वो आ जाते तो मजा आता! मगर अगर वो मेहमान की तरह चार दिन में न जाये तो मुझे क्या पापा तक को भी Problem हो जाती! गाँव जाते तब भी पापा मुझे बताते की हम Modern हो गए है! ये सब गाँव के देहाती है! तो मुझे तो बचपन से यही समझ आया की कामयाबी या बड़े जॉब या बिज़नेस के लिए बड़ी जगह आना चाहिए! साथ साथ पुराने रिश्ते तोड़कर नए रिश्ते बनाना चाहिए! ये मैने मेरे पापा से ही सीखा और जब उस वक़्त थोड़े Modern होने पर पापा ही अपने पापा को नहीं झेलते और अपने साथ नहीं रखते तो आज Ultra Modern होने पर आज मैं पापा के साथ नहीं रहना चाहता तो कौन सा पाप कर रहा हु! वैसे भी तो पापा हमेशा कहते रहते है! हमने अपना सारा जीवन तुम्हारी खुशियो पर ही कुर्बान किया है तो आज क्यों वो मुझे मेरी ख़ुशी के लिए अपने से दूर नहीं रहने देते ! मगर नहीं, जब से वापस आया हुँ! बस पीछे पड़े हुए है वापस आ जा अब में रिटायर हो गया हु! मैं तो उनकी बाते सुन-सुनकर परेशान हो गया! मैंने तो साफ़ कह दिया मैं नहीं आऊगा! Priya भी आना नहीं चाहती ! मैंने पापा से कहा भी की आप बोलो तो मैं हर महीने कुछ पैसे भिजवा दू ,नौकर Appoint कर लो मैं उसका पेमेंट कर दुगा! इतना कहा की पापा भड़क गए !
अरे इतना तो कर रहा हु आप ने तो कभी इतना भी नहीं किया होगा अपने पापा के लिए बस इतना कहा की पापा को मिर्ची लग गयी! चिला-चिल्लाकर कर बोलने लगे! जा यहाँ से मुझे तेरी जरुरत नहीं!
फिर तू आया तब सोफे में मुँह डालकर रोने लगे और मम्मी ने तो जैसे रोने में वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल किया है ! चार दिन के लिए आया था! यार सारा मूड Upset करके रख दिया अब दो दिन में ही जा रहा हुँ !
मुझे अब कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या बोलू और इससे पहले में कुछ सोच समझ पाता राज ही दोबारा बोल पड़ा !
चल तू ये सब छोड़ ये बता आज रात का तेरा क्या प्रोग्राम है ! विजय और विनोद को मैंने पार्टी के लिए बुलाया है! चल मिलकर पार्टी करते है ! वैसे भी कल Morning में मेरी Flight है !
पहले तो उसकी पार्टी की बात को सुनकर मैं अवाक् रह गया! फिर थोड़ी देर बाद मुझे वो भी थोड़ा सही लगने लगा ! जब उसके पापा अपने Career के लिए अपने माँ-बाप को छोड़ सकते है! तो वो छोड़ रहा है तो उन्हें क्यों प्रॉब्लम हो रही है! उन्हें प्रॉब्लम की जड़ को आज नहीं 30 साल पहले पकड़ना था !
हालांकि मैं आखिर तक decide नहीं कर पाया की आखिर राज और उसके पापा में गलत कौन है! हाँ मुझे इतना जरूर समझ आ गया की ये आज कल वापस आने वाला है राज के बेटे के रूप में मगर मैने अब उससे कुछ नहीं कहा और हम रात को पार्टी करने चलते है बोलकर वहा से चला गया!!



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